Tamil Nadu सरकार गठन LIVE अपडेट: विपक्ष के नेता राहुल गांधी कल TVK प्रमुख विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। TVK प्रमुख से मुलाक़ात के बाद कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने यह जानकारी दी। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) 234 सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। TVK ने 108 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ़ 10 कम हैं।
एक बड़े राजनीतिक बदलाव के तहत, कांग्रेस ने राज्य में नई सरकार बनाने के लिए TVK को अपना पूरा समर्थन दिया है। इसके साथ ही, तमिलनाडु में DMK के साथ कांग्रेस का लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन भी प्रभावी रूप से टूट गया है। पार्टी ने कहा कि TVK के साथ यह गठबंधन सिर्फ़ सरकार बनाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य के चुनावों, जिनमें स्थानीय निकाय चुनाव, लोकसभा और राज्यसभा चुनाव शामिल हैं, में भी जारी रहेगा। विजय 7 मई को शपथ लेंगे।

Tamil Nadu रिसॉर्ट रणनीति
रिसॉर्ट रणनीति: इस बीच, TVK ने अपने विधायकों को महाबलीपुरम के एक निजी लक्ज़री रिसॉर्ट में भेज दिया है, ताकि बहुमत के लिए ज़रूरी संख्या जुटाने की कोशिशों को तेज़ किया जा सके। 50 से ज़्यादा विधायक फ़िलहाल पूंजेरी के एक होटल में ठहरे हुए हैं, और बाक़ी विधायकों के भी वहाँ पहुँचने की उम्मीद है। इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
TNCC प्रमुख के. सेल्वपेरुंथगाई समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने इस बात की पुष्टि की कि विजय ने समर्थन के लिए उनसे संपर्क साधा था। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीतिक तस्वीर में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
गठबंधन पर बातचीत: एक इंटरव्यू में, मणिकम टैगोर ने स्वीकार किया कि विजय की पार्टी के साथ गठबंधन करने के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर ही मतभेद थे। राज्य और केंद्रीय स्तर के नेताओं के विचार इस मामले पर अलग-अलग थे। उन्होंने बताया कि इस फ़ैसले पर अंतिम मुहर पार्टी अध्यक्ष ने ही लगाई थी।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह फ़ैसला आम सहमति के आधार पर नहीं, बल्कि एक ‘रणनीतिक फ़ैसले’ के तौर पर लिया गया था। टैगोर ने इस गठबंधन को एक ‘व्यावहारिक कदम’ बताया, जिसका मक़सद विपक्ष को मज़बूत करना और BJP का मुक़ाबला करना है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह के फ़ैसले लेते समय अक्सर वैचारिक सिद्धांतों और ज़मीनी हकीक़त के बीच संतुलन बिठाना पड़ता है।
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