बिहार कैबिनेट विस्तार: CM Samrat Choudhary ने गृह और अहम मंत्रालय अपने पास रखे; नीतीश कुमार के बेटे निशांत को स्वास्थ्य मंत्रालय मिला

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए बिहार कैबिनेट विस्तार में इस बार एक अलग ही झलक देखने को मिली,जो न केवल जाति और क्षेत्रीय संतुलन की थी, बल्कि राजनीतिक विरासत की भी थी।

CMI Times Web Desk
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नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने गुरुवार को सामान्य प्रशासन, गृह, कैबिनेट सचिवालय, सतर्कता और नागरिक उड्डयन जैसे अहम मंत्रालय अपने पास रखे। नई सरकार बनने के बाद बिहार कैबिनेट के मंत्रालयों का बंटवारा किया गया। जिन विभागों को किसी मंत्री को नहीं सौंपा गया है, वे भी मुख्यमंत्री के अधीन ही रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कमान संभालेंगे।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग दिए गए, जबकि उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को वित्त मंत्रालय मिला। वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग सौंपा गया है।

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मुख्यमंत्री Samrat Choudhary कैबिनेट में बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे मंत्री के तौर पर शामिल हैं

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व में हुए बिहार कैबिनेट विस्तार में इस बार एक अलग ही झलक देखने को मिली,जो न केवल जाति और क्षेत्रीय संतुलन की थी, बल्कि राजनीतिक विरासत की भी थी। सम्राट कैबिनेट में बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे मंत्री के तौर पर शामिल हैं। इनमें से, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने सबसे ज़्यादा सुर्खियाँ बटोरी हैं; पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने न केवल अपनी पार्टी JD(U) को, बल्कि बिहार की जनता को भी एक अहम संदेश दिया है।

निशांत कुमार के अलावा, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा और पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन भी सम्राट कैबिनेट का हिस्सा बने हैं। नतीजतन, बिहार की राजनीति से जुड़ी चर्चाओं में “राजनीतिक विरासत” का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

जिस बारीकी से मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की नई टीम में जातीय समीकरणों को बुना गया है, उससे यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि BJP और JD(U) ने मिलकर समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व देने की पूरी कोशिश की है। इसके अलावा, क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने की व्यापक कवायद के तहत, यह कदम एक सोची-समझी रणनीतिक कोशिश है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिहार के हर कोने की शासन-प्रशासन में हिस्सेदारी हो।

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की नई टीम में एक समावेशी मेल देखने को मिलता है, जिसमें सीमांचल की विशिष्ट संस्कृति से लेकर शाहाबाद के मैदानी इलाकों और मिथिलांचल की समृद्ध विरासत तक, सभी का समावेश है।

कैबिनेट विस्तार पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुआ। जनता दल (यूनाइटेड), भारतीय जनता पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया गया। बिहार विधानसभा चुनावों में NDA की शानदार जीत के बाद यह पहला बड़ा फेरबदल था।

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